Monday, September 06, 2010

चलो चलें एक ऐसे समंदर के किनारे...

Poetry happens once a while.. and then happens Hindi.. :)

Here's a work I came up with while I was talking to somebody.. The work was initially smaller, which I extended and so, here's what came up :
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चलो चलते हैं ...
एक ऐसे समंदर के किनारे,
जहाँ आवाज़ हो तो पंछियों की...
जहाँ खुशबू हो तो सिर्फ बहारों की
जहाँ... कोई और हो... तो बस तुम
एक ऐसे समंदर के किनारे...

जहाँ ज़िन्दगी हो जीने का
जहाँ प्यार हो पीने का...
जहाँ मैं हूँ... और तुम हो
एक ऐसे समंदर के किनारे...

जहाँ रौशनी हो तुम्हारे आँखों की
जहाँ नज़ारा हो तुम्हारे चेहरे का...
जहाँ घटायें हो तुम्हारे जुल्फों से घने ...
जहाँ फिजायें, लहरों को छुमती
हमारे मन को कर जाए बावला...

एक ऐसे समंदर के किनारे...

एक वोह समंदर, वोह हमारा प्यार,
हर एक बूँद में लिखा हो जो तुम्हारा नाम...
एक ऐसे समंदर के किनारे
जहाँ खुशियाँ ही खुशियाँ हो,
जहाँ बस एक मैं, और एक तुम हो...

एक ऐसे समंदर के किनारे ॥

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